जलेसर का पथवारी माता मन्दिर

जलेसर जिस प्रकार अपने खान-पान और पीतल के काम के लिए जाना जाता है उसी प्रकार धार्मिक स्तर पर इसकी खास पहचान है। नवरात्रि के मौके पर हम जलेसर के धार्मिक स्थलों में से एक की बात करेंगें... और वह है पथवारी माता का मन्दिर!

माँ पथवारी मन्दिर जलेसर के सासनी रोड स्थित गोल नगर में प्रतिष्ठित है। वैसे तो भक्तों के लिए हर दिन पथवारी माँ की पूजा का है पर नवरात्रि के व्रत और पूजा के दिनों में विशेष उत्साह व भक्तिभाव नजर आता है।

पथवारी माता के बारे में विभिन्न कहानियां प्रचलित हैं। जैसे पथवारी माता, पाल और विनायक जी के आपसी बडप्पन की कथा। पीपल-पथवारी कथा, जिसमे चार बहुओं और सास के माध्यम से महत्ता का वर्णन है। पर सबसे ज्यादा नून और खांड के व्यापारियों के सामने वृध्दा के रूप प्रकट होने की कहानी सुनने को मिलती है।

इन कहानियों की भाषा राजस्थानी है। शायद यह दर्शाता है कि पुराने समय में राज्यों की परिधि से परे लोग व्यापार के लिए राजस्थान, हरियाणा के श्रेत्रों में मवेशियों और अनाज के साथ आते जाते थे जो कि दिनों का नहीं महीनों का मसला होता होगा। और जहाँ आप महीनों बिताओगे वहां भाषा, खान-पान और धार्मिक मान्यताओं का आदान-प्रदान तो स्वाभाविक है। इसीलिए गुड़गांव की शीतला माता और जलेसर की पथवारी माता के बीच सीधा संबंध महसूस होता है क्योंकि पथवारी की कहानी शीतला माता के पूजन के समय सुनी जाती है। बिना पथवारी माँ की कहानी सुने शीतला माता पूजन अधूरा माना जाता है।